समझें
CUET (UG) परीक्षा पैटर्न और अंकन
हर विषय का अलग पेपर, 60 मिनट में 50 अनिवार्य प्रश्न, +5 और −1 — वे संख्याएँ जो हर उम्मीदवार के लिए एक जैसी हैं, और पेपर का वह एक हिस्सा जो सचमुच आप चुनते हैं।
CUET (UG) का हर पेपर एक ही आकार का है: 50 प्रश्न, सभी अनिवार्य, 60 मिनट में हल करने हैं, वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय प्रश्न के रूप में, एक कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (CBT) पर। अंकन — सही उत्तर पर +5, ग़लत पर −1, और खाली छोड़े प्रश्न पर 0 — यानी पूरा पेपर 250 अंक का। आपने जितने विषयों के लिए registration कराया, उतने ऐसे पेपर देने हैं — अधिकतम 5 विषय — और परीक्षा कई shifts में, उम्मीदवारों की संख्या और subject choices के अनुसार में होती है।
कितने प्रश्न, और कितना समय?
प्रति पेपर 60 मिनट में 50 प्रश्न। हर प्रश्न अनिवार्य है; न भीतरी विकल्प है, न छोड़ने लायक कोई खंड। PwBD उम्मीदवारों को PwBD उम्मीदवारों के लिए प्रति घंटा 20 मिनट का compensatory time मिलता है।
CUET में अंकन कैसे होता है?
| परिणाम | अंक |
|---|---|
| सही उत्तर | +5 |
| ग़लत उत्तर | −1 |
| छोड़ा गया | 0 |
चूँकि हर प्रश्न अनिवार्य है, किसी खंड के सबसे कठिन प्रश्न छोड़ देने की पुरानी रणनीति अब नहीं चलती — पर खाली छोड़ने का नुक़सान कुछ नहीं, जबकि ग़लत अनुमान एक अंक काटता है। पेपर के बाद दो छपे हुए अपवाद स्कोर बदल सकते हैं: यदि एक से अधिक विकल्प सही निकलें, तो यदि एक से अधिक विकल्प सही पाए जाएँ, तो किसी भी सही विकल्प को चुनने वाले हर उम्मीदवार को +5 मिलता है; और यदि प्रश्न हटा दिया जाए, तो यदि कोई विकल्प सही न हो, या प्रश्न ग़लत हो या हटा दिया जाए, तो परीक्षा में बैठे हर उम्मीदवार को +5 मिलता है — चाहे उसने प्रश्न किया हो या नहीं।
पेपर किस भाषा में होता है?
परीक्षा 13 माध्यम में उपलब्ध है: Assamese, Bengali, English, Gujarati, Hindi, Kannada, Malayalam, Marathi, Punjabi, Odia, Tamil, Telugu, Urdu। प्रश्नपत्र आपके चुने माध्यम के साथ-साथ English में भी दिखता है, और किसी भी मतभेद की स्थिति में English संस्करण मान्य होगा। फ़ॉर्म में सोच-समझकर चुनें, क्योंकि आवेदन फ़ॉर्म में चुना गया माध्यम बाद में बदला नहीं जा सकता।
कौन-से पेपर चुन सकते हैं?
13 भाषाएँ, 23 डोमेन विषय और 1 General Aptitude Test में से — कुल अधिकतम 5 विषय, और Class XII में लिए गए subjects से स्वतंत्र। कौन-से, यह पूरी तरह आपके लक्षित programmes पर निर्भर है; मैचर इसे हल करता है और संयोजन जाँचक उसकी क़ीमत बताता है।
Shift आपके चुनने की चीज़ नहीं: उम्मीदवारों को shift का आवंटन उनके चुने विकल्पों और तकनीकी-प्रशासनिक कारणों से होता है, और तारीख़ या shift बदलने का कोई अनुरोध स्वीकार नहीं होता।
पैटर्न क्या तय नहीं करता
किसी syllabus की हर इकाई से कितने प्रश्न आएँगे — NTA का कोई दस्तावेज़ यह विभाजन नहीं छापता — और पेपर कितना कठिन होगा। कठिन shift का कच्चा अंक आसान shift के अंक के बराबर बाद में किया जाता है, उस प्रक्रिया से जो normalization पृष्ठ पर है।
यह पृष्ठ जो नहीं बताता
- हर यूनिट से कितने प्रश्न आएंगे। सिलेबस केवल विषय छापता है, प्रश्न-संख्या नहीं, और NTA का कोई दस्तावेज़ यह बंटवारा प्रकाशित नहीं करता।
- पेपर कितना कठिन होगा, या कच्चा अंक शिफ़्टों में सामान्यीकृत स्कोर कैसे बनता है।
- आपके कार्यक्रमों को कौन-से पेपर चाहिए। पैटर्न सबके लिए एक-सा है; चयन नहीं, और वही एकमात्र हिस्सा है जो आप तय करते हैं।